नई दिल्ली। भारत सरकार के आयकर विभाग में आयकर आयुक्त (Income Tax Commissioner), प्रख्यात कलाकार, राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी एवं बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी मोनिका राणा जी ने आज आध्यात्मिक गुरु एवं OOJ Foundation के संस्थापक योगी प्रियव्रत अनिमेष जी से सौहार्दपूर्ण भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर योगी प्रियव्रत अनिमेष जी ने मोनिका राणा जी को अपनी चर्चित आध्यात्मिक कृति “आकाश (AKASHA – The Mystical Deluge)” भेंट स्वरूप प्रदान की। यह पुस्तक चेतना, आत्मबोध, ध्यान, ऊर्जा विज्ञान तथा मानव जीवन के आध्यात्मिक आयामों पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है।

भेंट के दौरान कला, चेतना, योग, नेतृत्व, प्रशासनिक उत्तरदायित्व तथा आधुनिक जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। योगी प्रियव्रत अनिमेष जी ने कहा कि जब प्रशासनिक क्षमता, रचनात्मकता और आध्यात्मिक दृष्टि एक साथ कार्य करती हैं, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन की संभावनाएँ कई गुना बढ़ जाती हैं।

योगी जी ने मोनिका राणा जी के बहुआयामी व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रशासनिक सेवा जैसे अत्यंत उत्तरदायित्वपूर्ण क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए कला और खेल के माध्यम से जीवन में संतुलन और रचनात्मकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं, जो यह संदेश देते हैं कि सफलता केवल पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि व्यक्तित्व की पूर्णता से प्राप्त होती है।

मोनिका राणा जी ने भी योगी प्रियव्रत अनिमेष जी के विचारों, आध्यात्मिक दृष्टिकोण और चेतना के विज्ञान पर आधारित उनके कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक शांति, आत्म-जागरूकता और आंतरिक संतुलन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है तथा योग और ध्यान मानव जीवन को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।

बैठक के दौरान विशेष रूप से इस विषय पर विचार-विमर्श हुआ कि कला और आध्यात्मिकता दोनों ही मानव चेतना को विस्तार देने के सशक्त माध्यम हैं। चित्रकला, संगीत, योग और ध्यान व्यक्ति को स्वयं से जोड़ते हैं तथा समाज में संवेदनशीलता, करुणा और सकारात्मक सोच का विकास करते हैं।

योगी प्रियव्रत अनिमेष जी ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की प्राचीन योगिक एवं आध्यात्मिक परंपराएँ आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर मानव कल्याण का आधार बनेंगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन, शिक्षा, कला और आध्यात्मिकता के समन्वय से ही एक संतुलित और जागरूक समाज का निर्माण संभव है।

यह भेंट केवल दो विशिष्ट व्यक्तित्वों का मिलन नहीं थी, बल्कि प्रशासन, कला और अध्यात्म के बीच एक सार्थक संवाद का अवसर भी बनी। इस अवसर ने यह संदेश दिया कि व्यावसायिक उत्कृष्टता और आध्यात्मिक चेतना साथ-साथ चल सकती हैं तथा दोनों मिलकर व्यक्ति और समाज के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

जारीकर्ता
OOJ Foundation
Office of Yogi Priyavrat Animesh

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