योगी जी की आध्यात्मिक यात्रा | 10 अक्टूबर 2026 | नई दिल्ली–उज्जैन
महाकाल की नगरी में पितृमुक्ति का रहस्य : श्राद्ध, तर्पण और पिण्डदान का सनातन महत्त्व
पितृऋण से मुक्ति और पूर्वजों की सद्गति की कामना हेतु योगी प्रियव्रत अनिमेष की उज्जैन यात्रा
नई दिल्ली/उज्जैन, 10 अक्टूबर 2026।
सनातन धर्म में पितृयज्ञ को पंचमहायज्ञों में विशेष स्थान प्राप्त है। श्रद्धापूर्वक किया गया श्राद्ध, जल-तिल से तर्पण तथा अन्नमय पिण्डदान पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, पितृशान्ति और सद्गति की कामना के पवित्र अनुष्ठान हैं।
भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित सिद्धवट तीर्थ पितृकर्म की प्राचीन एवं पुण्यभूमि माना जाता है। शिप्रा तट पर श्राद्ध, तर्पण, पिण्डदान और त्रिपिण्डी श्राद्ध की विशिष्ट धार्मिक परम्परा है।
इसी सनातन परम्परा के अन्तर्गत योगी प्रियव्रत अनिमेष उज्जैन की आध्यात्मिक यात्रा पर जा रहे हैं, जहाँ भगवान महाकाल के दर्शन एवं पूर्वजों की सद्गति हेतु पितृकर्म का विशेष महत्त्व है।
शास्त्रीय दृष्टि से श्राद्ध पितृशान्ति और सद्गति का साधन है, जबकि मोक्ष परम आध्यात्मिक लक्ष्य है। पितरों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता ही पितृयज्ञ का मूल संदेश है।
— योगी प्रियव्रत अनिमेष
संस्थापक-अध्यक्ष, OOJ Foundation
